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सज्दा-ए-तिलावत न करने की सूरत में इसाल-ए-सवाब हो जाएगा?

सज्दा-ए-तिलावत न करने की सूरत में इसाल-ए-सवाब हो जाएगा? दारुल इफ़्ता अहले सुन्नत,फतवा,सज्दा-ए-तिलावत,

 

सज्दा-ए-तिलावत न करने की सूरत में इसाल-ए-सवाब हो जाएगा? दारुल इफ़्ता अहले सुन्नत,फतवा,सज्दा-ए-तिलावत,

सज्दा-ए-तिलावत न करने की सूरत में इसाल-ए-सवाब हो जाएगा?

सवाल: अगर किसी ने पूरा क़ुरआन-ए-पाक पढ़ा लेकिन उसने सज्दा-ए-तिलावत नहीं किए, तो क्या क़ुरआन-ए-पाक पढ़ने का सवाब किसी को तोहफ़े में दे सकता है? (रुक्न-ए-शूरा का सवाल)

जवाब: क़ुरआन-ए-पाक पढ़ने वाले पर जो सज्दे वाजिब हुए थे, वे अब भी बाक़ी हैं। उन्हें अदा करने का वक़्त उम्र भर है। अगर सज्दे कभी भी नहीं करेगा, तो गुनहगार होगा।

(1) बहरहाल, ऐसी कोई रिवायत नहीं पढ़ी कि जब तक सज्दे न किए जाएँ तो उसको तिलावत का सवाब नहीं मिलेगा, लिहाज़ा जब उसको सवाब मिलेगा, तो इसाल-ए-सवाब भी कर सकता है।

رد المحتار، کتاب الصلاة، باب سجود التلاوة، ۲ / ۷۰۳ ماخوذاً، دار المعرفة، بیروت


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