रोज़े की नीयत करना भूल जाए तो क्या रोजा होजाएगा
सवाल: मैंने रोज़े के लिए सहरी की, सहरी के बाद दाँत साफ़ किए, फिर वुज़ू किया लेकिन रोज़े की नीयत करना भूल गया। और जब रोज़े का वक़्त ख़त्म होने के बाद अज़ान हो रही थी, तो रोज़े की नीयत की। क्या मेरा रोज़ा हो गया? بِسْمِ اللہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ اَلْجَوَابُ بِعَوْنِ الْمَلِکِ الْوَھَّابِ اَللّٰھُمَّ ھِدَایَۃَ الْحَقِّ وَالصَّوَابِ पूछी गई सूरत में आपका रोज़ा हो गया , क्योंकि रोज़े के लिए सहरी करना ही रोज़े की नीयत होता है। यानी अगर कोई शख़्स रोज़ा रखने के इरादे से सहरी कर ले और अलग से ज़बान से नीयत के अल्फ़ाज़ अदा न करे, तब भी उसका रोज़ा हो जाता है। चुनांचे मुफ़्ती अमजद अली आज़मी رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने बहार-ए-शरीअत में फ़रमाया: "सहरी खाना भी नीयत है, ख़्वाह रमज़ान के रोज़े के लिए हो या किसी और रोज़े के लिए।" ( बहार-ए-शरीअत, जिल्द 01, सफ़हा 969, मतबूआ मक्तबतुल मदीना, कराची )