मेरा सवाल यह है कि नाबालिग बच्चे का एतिकाफ़ में बैठना कैसा?
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَلْجَوَابُ بِعَوْنِ الْمَلِكِ الْوَهَّابِ، اَللّٰهُمَّ هِدَايَةَ الْحَقِّ وَالصَّوَابِ۔
एतिकाफ़ में बैठने के लिए बालेग़ (व्यस्क) होना शर्त नहीं है। इसलिए जो नाबालिग़ बच्चा समझदार हो, अगर वह निय्यत-ए-एतिकाफ़ के साथ मस्जिद में ठहरे, तो उसका एतिकाफ़ सही हो जाएगा।
चुनांचे फतावा आलमगीरी में है:
واما البلوغ فلیس بشرط لصحۃ الاعتکاف فیصح من الصبی العاقل
तर्जमा
"और बहरहाल एतिकाफ़ सही होने के लिए बालेग़ होना शर्त नहीं है, इसलिए समझदार नाबालिग़ बच्चे का एतिकाफ़ भी सही है।"
(फतावा आलमगीरी, ज 01, किताब-उस-स्याम, बाब-उल-एतिकाफ़, स 233, दार-उल-कुतुब अल-इल्मिय्या, बेरूत)
बहार-ए-शरीअत में है:
"मस्जिद में अल्लाह (अज़्ज़ व जल) के लिए निय्यत के साथ ठहरना एतिकाफ़ है और इसके लिए मुसलमान, आक़िल (समझदार) और जनाबत, हाइज़ व निफ़ास से पाक होना शर्त है। बालेग़ (व्यस्क) होना शर्त नहीं, बल्कि नाबालिग़ जो तमीज़ रखता है, अगर निय्यत-ए-एतिकाफ़ के साथ मस्जिद में ठहरे, तो यह एतिकाफ़ सही है।"
(बहार-ए-शरीअत, ज 01, हिस्सा 05, स 1020, मक्तबत-उल-मदीना)
وَاللّٰهُ أَعْلَمُ عَزَّوَجَلَّ وَرَسُوْلُهُ أَعْلَمُ صَلَّى اللّٰهُ تَعَالٰى عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ